पत्रकारों में घुमंतू जनजाति और समाजसेवा से संबंधित खबरों को लेकर इतनी संवेदनहीनता क्यों?सवाल पर पद्म श्री से सम्मानित वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्री गिरीश वाई. प्रभुने का जवाब..


Friday Dialogue IIMC Delhi | विषय : भारत की घुमंतू जनजातियां| 10 Feb 2023 | Speaker : श्री गिरीश वाई. प्रभुने (पद्म श्री से सम्मानित वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता) 

सचिन समर : 

"पत्रकारों को समाजसेवा जैसी भावना लाने के लिए क्या करना चाहिए वैसे हिंदी भाषी पत्रकार संवेदनशील तो होते हैं। किंतु कहा जाता है अंग्रेजी पत्रकारों में संवेदनशीलता कम देखने को मिलती है। पत्रकारों में समाजसेवा और घुमंतू जनजाति से संबंधित समाचारों या खबरों को लेकर इतनी संवेदनहीनता क्यों रहती है? कृपया इस पर प्रकाश डालें।" 

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बिना कुछ बोले होता है अस्सी प्रतिशत संचार : डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष

"संत रैदास का संचार शास्त्र एक गूढ़ प्रश्न है"

"बिना कुछ बोले होता है अस्सी प्रतिशत संचार"

भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली में आयोजित "शुक्रवार संवाद" में बोले प्रख्यात कवि एवं संपादक डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष

नई दिल्ली, 3 फरवरी । भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली में आयोजित शुक्रवार संवाद के दौरान प्रख्यात कवि एवं संपादक डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष ने कहा "संत रैदास का संचार शास्त्र एक गूढ़ प्रश्न है। इसे समझने के लिए संचार की मूल अवधारणा को समझना होगा। मुख्यतः संचार ज्ञान और सूचनाओं पर आधारित होता है। जिसका उददेश्य ट्रांस्फॉर्मेशन होता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार अस्सी प्रतिशत संचार अशाब्दिक होता है। उन्होंने आगे कहा आध्यात्मिक संचार, संचार का एक ऐसा ही रूप है जिसमें 'ट्रांस्फॉर्मेशन' से भी आगे जाकर 'जेनरेशन' पर जोर दिया जाता है। संत रविदास का संचार भी रूपांतरण और सृजन दोनों के विचार को साकार करता है।" कार्यक्रम में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, अपर महानिदेशक श्री आशीष गोयल, डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह एवं डीन (छात्र कल्याण) प्रो. प्रमोद कुमार सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। 


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Source : IIMC Social Media


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भारत के पास दुनिया को नेतृत्व करने की क्षमता : स्वामी नरसिम्हानंद



"सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचें युवा"

भारतीय जन संचार संस्थान में आयोजित हुआ शुक्रवार संवाद कार्यक्रम

नई दिल्ली, 13 जनवरी। "भारत के पास इतनी काबिलियत है कि वह दुनिया का नेतृत्व कर सकता है" उक्त बातें रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम कोझीकोड के सचिव और प्रबुद्ध भारत के पूर्व सम्पादक स्वामी नरसिम्हानंद ने शुक्रवार संवाद के दौरान कही। इस अवसर पर आईआईएमसी के महानिदेशक संजय द्विवेदी, डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह एवं डीन (छात्र कल्याण) प्रो. प्रमोद कुमार सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

सोशल मीडिया का जिक्र करते हुए स्वामी असीमानंद ने कहा यह युवाओं में नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है युवा अपने ओपिनियन सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड मैसेज के आधार पर बना रहे वह पुस्तक से लगातार दूर हो रहे हैं जो कि अच्छी बात नहीं है। सोशल मीडिया पावरफुल टूल है इसका सदुपयोग होना चाहिए। युवाओं में नकारात्मकता और डिप्रेशन बढ़ रही है। युवाओं को योग, ध्यान जीवन में शामिल करना चाहिए। 28-30 उम्र के ज्यादातर युवा अपने जीवन का मकसद नहीं जान पा रहे हैं। स्वामी विवेकानंद हर परिस्थिति में सकारात्मक रहते थे। उन्होंने एआई का जिक्र करते हुए कहां के हैं एआई इंसानों की जगह नहीं ले सकता क्योंकि उसके अंदर संवेदना और भाव नहीं हो सकती। 

कार्यक्रम का संचालन जम्मू कैंपस के क्षेत्रीय निर्देशक प्रोफेसर राकेश गोस्वामी ने किया। 

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इमेज और रियलिटी का अंतर अनुसूचित जनजाति की अव्यक्त पीड़ा : हर्ष चौहान


"अनुसूचित जनजाति के संवेदना को  जरूरी"

"अनुसूचित जनजाति को लेकर है लोगों में गलत धारणा"

भारतीय जन संचार संस्थान में 'शुक्रवार संवाद' कार्यक्रम में शामिल हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष हर्ष चौहान

नई दिल्ली, 6 जनवरी। "इमेज और रियलिटी का अंतर अनुसूचित जनजाति की अव्यक्त पीड़ा है, जिसे सुना नहीं गया" ये बातें राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष हर्ष चौहान ने भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा आयोजित कार्यक्रम शुक्रवार संवाद के दौरान कही। इस अवसर पर आईआईएमसी के अपर महानिदेशक प्रो. आशीष गोयल, डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह एवं डीन (छात्र कल्याण) प्रो. प्रमोद कुमार सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

श्री चौहान ने कहा अनुसूचित जनजाति को लेकर लोगों में गलत धारणाएं हैं। फिल्म और पुस्तक में पढ़ी गयी जानकारी के आधार पर लोग इस समुदाय के प्रति गलत छवि बना ले रहे हैं जबकि सचाई यह नहीं है। अंग्रेजों के पहले अनुसूचित जनजाति की छवि बेहतर थी। हॉलीवुड फिल्मों ने समुदाय की छवि को काफी नुकसान पहुँचाया है। हालांकि संविधान निर्माताओं ने जनजाति समुदाय की संवेदनाओं को समझा है। संविधान निर्माण के दौरान अनुसूचित जनजाति समुदाय को लेकर खूब मंथन किया गया और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार उन्हें अधिकार दिए गए। 

उन्होंने आगे कहा अनुसूचित जनजाति की अस्मिता, अस्तित्व और विकास को लेकर अमृत महोत्सव में कार्य किया जा रहा है। श्री चौहान ने संबोधित करते हुए कहा कि जनजाति समुदाय की विशेषताओं को लेकर प्राथमिक स्तर पर शोध की  आवश्यकता है। वन में रहने वाले लोग हिंसक होते हैं इस इमेज को सुधारना होगा, जिसमें मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है। मीडिया को ग्राउंड जीरो के जरिये छवि निर्माण करने की जरूरत है। अंत में उन्होंने सभी से आग्रह करते हुए कहा कि समय निकाल कर जनजाति समुदायों के पास जरूर जाएं। 

कार्यक्रम का संचालन डीन (छात्र कल्याण) प्रो. प्रमोद कुमार ने और धन्यवाद ज्ञापन सुश्री मनपा ने दिया। 

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"फिल्म समीक्षा से पहले फिल्म निर्माण को समझना जरूरी" - अनंत विजय

 




"फिल्म समीक्षा ऐसी हो जैसे उपदेश दिया जा रहा हो"

'शुक्रवार संवाद' में बोले प्रख्यात फिल्म समीक्षक व दैनिक जागरण के एसोसिएट एडिटर अनंत विजय 

भारतीय जन संचार संस्थान में 'शुक्रवार संवाद' कार्यक्रम का आयोजन


नई दिल्ली, 30 दिसंबर। भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'शुक्रवार संवाद' में 'फिल्म समीक्षा' विषय पर संबोधित करते हुए दैनिक जागरण के एसोसिएट एडिटर व प्रख्यात फिल्म समीक्षक श्री अनंत विजय ने कहा कि फिल्म समीक्षा में गुण और दोष दोनों की बात करनी चाहिए। फिल्म समीक्षा से पहले फिल्म निर्माण को समझना बेहद जरूरी है। इस अवसर पर आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी एवं डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह, डीन (छात्र कल्याण) प्रो. प्रमोद कुमार सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

श्री विजय ने बताया फिल्म समीक्षा के दौरान पहले फिल्म की पटकथा पर बात करनी चाहिए। समीक्षक को तकनीक पहलुओं जैसे फिल्म प्रोडक्शन, कैमरा वर्क, साउंड, एडिटिंग, स्क्रीन प्ले आदि का भी जानकर होना आवश्यक है। तकनीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा फिल्म निर्माण में तकनीकी ने क्रांति जरूर लायी है लेकिन वास्तविक संवेदना को उत्पन्न करना तकनीक में संभव नहीं। श्री विजय ने आगे कहा फिल्म समीक्षा ऐसी हो जैसे उपदेश दिया जा रहा हो। फिल्मों की कहानी तीन शब्दों के इर्द गिर्द होती है - राम था, सीता थी, रावण आ गया। फिल्म का अंत सुखद रहा या दुःखद इस पर भी ध्यान देना चाहिए। 

कार्यक्रम का संचालन जम्मू कैंपस से प्रो. राकेश गोस्वामी ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन आईजल कैंपस से डॉ. किमी ने दिया।


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